नवग्रह मंत्र वे वैदिक और पौराणिक मंत्र हैं जिनसे सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, इन नौ ग्रहों की शांति और कृपा के लिए प्रार्थना की जाती है। ज्योतिष के अनुसार जीवन में स्वास्थ्य, धन, विवाह, करियर और मानसिक शांति पर इन्हीं नौ ग्रहों का प्रभाव माना गया है। इस लेख में डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री (सौभाग्य पथ) बता रहे हैं कि नवग्रह स्तोत्र, हर ग्रह का बीज मंत्र और नवग्रह शांति मंत्र क्या है, और उनका जप किस विधि से करना चाहिए।
नवग्रह मंत्र क्यों जपे जाते हैं?
जन्म कुंडली में कोई ग्रह नीच का हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो या उसकी महादशा-अंतर्दशा कठिन चल रही हो, तो उस ग्रह के मंत्र का जप, दान और पूजा उपाय के रूप में बताए जाते हैं। जिनको अपनी कुंडली की ठीक जानकारी नहीं है, वे भी प्रतिदिन नवग्रह स्तोत्र का पाठ करके सभी ग्रहों का एक साथ स्मरण कर सकते हैं। यह सबसे सरल और सुरक्षित उपाय माना जाता है।
आचार्य जी के स्वर में नवग्रह मंत्र (लिरिक्स सहित) सुनें और साथ में पाठ करें:
नवग्रह स्तोत्र (महर्षि व्यास रचित)
यह नौ श्लोकों का प्रसिद्ध स्तोत्र है। हर श्लोक एक ग्रह की स्तुति है। इसे प्रातः स्नान के बाद पढ़ना श्रेष्ठ है।
सूर्य की स्तुति
जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥१॥
चंद्र की स्तुति
दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥२॥
मंगल की स्तुति
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥३॥
बुध की स्तुति
प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥४॥
गुरु (बृहस्पति) की स्तुति
देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥५॥
शुक्र की स्तुति
हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥६॥
शनि की स्तुति
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥७॥
राहु की स्तुति
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥८॥
केतु की स्तुति
पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥९॥
नौ ग्रहों के बीज मंत्र और जप का दिन
बीज मंत्र छोटे और प्रभावशाली माने जाते हैं। जिस ग्रह की शांति करनी हो, उसके दिन से जप आरंभ करें और रोज़ कम से कम एक माला (108 बार) जपें।
- सूर्य (रविवार): ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥
- चंद्र (सोमवार): ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥
- मंगल (मंगलवार): ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः॥
- बुध (बुधवार): ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः॥
- गुरु (गुरुवार): ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥
- शुक्र (शुक्रवार): ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
- शनि (शनिवार): ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
- राहु (शनिवार): ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
- केतु (शनिवार): ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥
नवग्रह शांति मंत्र
सभी नौ ग्रहों की एक साथ शांति के लिए पूजा के अंत में यह श्लोक पढ़ा जाता है:
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
नवग्रह मंत्र जप की विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
- सामने भगवान गणेश और नवग्रह का चित्र या यंत्र रखें, घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य बोलते हुए संकल्प लें।
- पहले गणेश जी का स्मरण करें, फिर नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें।
- जिस ग्रह की शांति करनी है, उसके बीज मंत्र की रुद्राक्ष या संबंधित माला से कम से कम एक माला जपें।
- अंत में नवग्रह शांति मंत्र पढ़ें, भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें और जप भगवान को अर्पित करें।
नवग्रह मंत्र जप के नियम और सावधानियाँ
- मंत्र का उच्चारण शुद्ध रखें। आरंभ में आचार्य जी का वीडियो सुनकर उच्चारण सीखें।
- जप के दिनों में सात्विक भोजन करें और नशे से दूर रहें।
- एक ही समय और एक ही स्थान पर रोज़ जप करना अधिक फलदायी माना जाता है।
- किसी विशेष ग्रह-दोष के लिए जप संख्या, रत्न या पूजा कुंडली देखकर ही तय करें। बिना परामर्श के रत्न धारण न करें।
यदि कुंडली में ग्रह-दोष अधिक हो, तो विधिपूर्वक नवग्रह शांति पूजा करवाई जाती है। चंद्र से जुड़े उपायों के लिए शरद पूर्णिमा 2026 का लेख भी पढ़ें, और अपनी कुंडली का पूरा विश्लेषण कुंडली रिपोर्ट से करवाएँ।
नवग्रह मंत्र: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
नवग्रह स्तोत्र प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद पढ़ना श्रेष्ठ है। किसी एक ग्रह का बीज मंत्र उस ग्रह के वार से शुरू करके रोज़ एक ही समय पर जपना चाहिए।
हाँ, श्रद्धा और शुद्धता के साथ कोई भी नवग्रह स्तोत्र का पाठ कर सकता है।
प्रचलित नवग्रह स्तोत्र महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित माना जाता है, जिसमें नौ श्लोकों में नौ ग्रहों की स्तुति है।
यह जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति और चल रही दशा से तय होता है। कुंडली दिखाकर ही विशेष ग्रह का मंत्र, जप संख्या और उपाय तय करना उचित है।
नवग्रहों के बारे में सामान्य जानकारी के लिए नवग्रह (विकिपीडिया) भी देख सकते हैं।
अपनी कुंडली के अनुसार कौन सा ग्रह कमजोर है और कौन सा मंत्र आपके लिए उचित है, यह जानने के लिए डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री से ऑनलाइन ज्योतिष परामर्श लें।
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