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शरद पूर्णिमा 2026 – चाँदनी में खीर, डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री

शरद पूर्णिमा 2026: महत्व, खीर का रहस्य, पूजा विधि और मंत्र

शरद पूर्णिमा 2026 का पर्व 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि पूरे वर्ष में यही एक रात है जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर धरती पर अमृत समान चाँदनी बरसाता है। इस लेख में डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री (सिद्ध ज्योतिष केंद्र, सौभाग्य पथ) बता रहे हैं कि इस रात का महत्व क्या है, चाँदनी में खीर क्यों रखी जाती है, घर पर सरल पूजा विधि क्या है और कौन से मंत्र जपने चाहिए।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा 2026 25 अक्टूबर 2026, रविवार को है। व्रत, माँ लक्ष्मी की पूजा, रात्रि जागरण और चाँदनी में खीर रखने की परंपरा इसी रात निभाई जाएगी। अगली सुबह स्नान-दान के बाद खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। अपने शहर के अनुसार पूजा का शुभ समय जानना हो तो स्थानीय पंचांग देखें या आचार्य जी से परामर्श लें।

शरद पूर्णिमा का महत्व

शास्त्रों में शरद पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। इसके महत्व के चार मुख्य कारण हैं:

  • सोलह कलाओं वाला चंद्रमा: इस रात चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट और पूर्ण प्रकाशित दिखता है। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस रात की साधना मन को शांत और स्थिर करने वाली मानी जाती है।
  • कोजागरी पूर्णिमा: लोक-मान्यता है कि इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और पूछती हैं, “को जागर्ति?” यानी “कौन जाग रहा है?” जो भक्त जागकर भक्ति-भाव से उनका स्मरण करता है, उस पर उनकी कृपा होती है। इसीलिए बिहार, बंगाल, ओडिशा और मिथिला क्षेत्र में इसे कोजागरा के नाम से भी मनाते हैं।
  • श्रीकृष्ण का महारास: श्रीमद्भागवत के अनुसार इसी शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं।
  • स्वास्थ्य और आयुर्वेद: वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु में शरीर में पित्त बढ़ता है। ठंडी चाँदनी और दूध-चावल की खीर को पित्त-शामक माना गया है, इसलिए यह परंपरा स्वास्थ्य से भी जुड़ी है।

आचार्य जी ने इस पर्व पर विस्तार से वीडियो बनाया है। खीर बनाने से लेकर महालक्ष्मी यंत्र और मंत्र-जप तक की पूरी विधि नीचे देखें:

शरद पूर्णिमा 2026: “को जागर्ति?” — डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री (Saubhagyapath YouTube)

चाँदनी में खीर का रहस्य

शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपरा है रात में खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखना। मान्यता है कि इस रात की चाँदनी में अमृत-तत्व होता है, जो खीर में समा जाता है और अगली सुबह यह खीर प्रसाद के रूप में आरोग्य और प्रसन्नता देती है। इस विषय पर हमारा विस्तृत लेख शरद पूर्णिमा पर चाँदनी में खीर क्यों रखी जाती है? भी पढ़ें।

खीर कैसे बनाएँ

  • संभव हो तो देसी गाय का दूध लें और उसे धीमी आँच पर गाढ़ा करें।
  • धुले हुए चावल डालें और पकने दें। मिठास के लिए सफ़ेद चीनी की जगह मिश्री या देसी खांड अच्छी मानी जाती है।
  • इलायची, केसर और थोड़े सूखे मेवे डालें। खीर सात्विक रखें, उसमें प्याज़-लहसुन वाले बर्तन का प्रयोग न करें।

खीर किस बर्तन में और कैसे रखें

  • चाँदी, मिट्टी, पीतल या काँच का बर्तन सबसे अच्छा है। एल्युमिनियम या प्लास्टिक के बर्तन से बचें।
  • खीर को छत, आँगन या खिड़की पर ऐसी जगह रखें जहाँ सीधी चाँदनी पड़े।
  • धूल और कीड़ों से बचाने के लिए ऊपर पतला सूती या मलमल का कपड़ा या जालीदार ढक्कन रखें, ताकि चाँदनी पहुँचती रहे।
  • खीर को रात में तीन-चार घंटे चाँदनी में रहने दें और अगली सुबह भगवान को भोग लगाकर परिवार में प्रसाद बाँटें।

शरद पूर्णिमा पूजा विधि (घर पर सरल विधि)

  1. सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और व्रत या पूजा का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थान पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. घी का दीपक जलाएँ। माँ लक्ष्मी को रोली, अक्षत, कमल या लाल फूल, इत्र और मिठाई अर्पित करें।
  4. शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल या दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
  5. खीर बनाकर पहले माँ लक्ष्मी को भोग लगाएँ, फिर उसे चाँदनी में रखें।
  6. रात में कुछ समय जागरण करें, लक्ष्मी मंत्र या श्री सूक्त का पाठ करें और भजन-कीर्तन करें।
  7. अगली सुबह खीर का प्रसाद स्वयं लें, परिवार में बाँटें और सामर्थ्य अनुसार दान करें।

शरद पूर्णिमा के मंत्र

पूजा के समय और रात्रि जागरण में इन प्रचलित मंत्रों का श्रद्धा से जप करें। जप के लिए कमलगट्टे या स्फटिक की माला उत्तम मानी जाती है और कम से कम एक माला (108 बार) जप करें।

माँ लक्ष्मी का मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

महालक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

चंद्रमा का बीज मंत्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥

चंद्र देव का स्तुति श्लोक (अर्घ्य देते समय)

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा के लिए श्री सूक्त का पाठ भी बहुत फलदायी है। आचार्य जी का श्री सूक्तम् (लिरिक्स सहित) वीडियो देखकर आप साथ में पाठ कर सकते हैं।

शरद पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • माँ लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करें।
  • चंद्रमा को अर्घ्य दें और कुछ समय चाँदनी में बैठकर मंत्र-जप या ध्यान करें।
  • खीर, दूध, चावल, सफ़ेद वस्त्र या चाँदी का दान करना शुभ माना जाता है।
  • घर को साफ़ रखें और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएँ।

क्या न करें

  • इस दिन तामसिक भोजन, मांस-मदिरा और नशे से दूर रहें।
  • घर में कलह, क्रोध और किसी का अपमान न करें।
  • खीर को एल्युमिनियम या प्लास्टिक के बर्तन में न रखें और खुले में बिना ढके न छोड़ें।
  • मधुमेह या कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो खीर का प्रसाद थोड़ी मात्रा में ही लें, आवश्यकता हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

आने वाले व्रत-त्योहार

शरद पूर्णिमा के साथ ही कार्तिक मास शुरू होता है, जिसमें दीपावली और छठ महापर्व आते हैं। पढ़ें: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन की सरल विधि और छठ पूजा: चार दिन के महाव्रत का महत्व और नियम।

शरद पूर्णिमा 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

शरद पूर्णिमा 2026 में 25 अक्टूबर, रविवार को है। इसी रात माँ लक्ष्मी की पूजा, रात्रि जागरण और चाँदनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाती है।

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

मान्यता है कि इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर आकर पूछती हैं “को जागर्ति?” यानी कौन जाग रहा है। जो भक्त जागकर उनका स्मरण करता है, उस पर उनकी कृपा होती है। इसी कारण इसे कोजागरी पूर्णिमा कहते हैं।

शरद पूर्णिमा की खीर कितनी देर चाँदनी में रखनी चाहिए?

परंपरा के अनुसार खीर को रात में तीन-चार घंटे चाँदनी में रखा जाता है और अगली सुबह भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

शरद पूर्णिमा पर कौन सा मंत्र जपें?

माँ लक्ष्मी के लिए “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” और चंद्रमा के लिए “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का जप कर सकते हैं। श्री सूक्त का पाठ भी बहुत शुभ माना जाता है।

क्या शरद पूर्णिमा पर व्रत रखना आवश्यक है?

व्रत रखना श्रद्धा पर निर्भर है। जो व्रत न रख सकें, वे सात्विक भोजन करें, माँ लक्ष्मी की पूजा करें, चंद्रमा को अर्घ्य दें और खीर का प्रसाद लें।

अपनी कुंडली के अनुसार चंद्र दोष, धन-समस्या या किसी विशेष पूजा के बारे में जानना हो तो डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री से ऑनलाइन ज्योतिष परामर्श बुक करें। सौभाग्य पथ परिवार की ओर से आप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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और वीडियो देखें: YouTube @Saubhagyapath

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